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अपर्णा यादव के झंडा जलाने पर सियासत गरम, सपा नेता अरविंद सिंह गोप ने दी चेतावनी

लखनऊ/बाराबंकी, 19 अप्रैल।उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब बीजेपी नेत्री अपर्णा यादव द्वारा समाजवादी पार्टी (सपा) का झंडा जलाने का मामला सामने आया। इस घटना के बाद सपा...

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अपर्णा यादव के झंडा जलाने पर सियासत गरम, सपा नेता अरविंद सिंह गोप ने दी चेतावनी

लखनऊ/बाराबंकी, 19 अप्रैल।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब बीजेपी नेत्री अपर्णा यादव द्वारा समाजवादी पार्टी (सपा) का झंडा जलाने का मामला सामने आया। इस घटना के बाद सपा नेताओं में नाराजगी बढ़ गई है। पूर्व मंत्री और सपा के वरिष्ठ नेता अरविंद सिंह गोप ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए न सिर्फ घटना की निंदा की बल्कि कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

बताया जा रहा है कि लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक और परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक तनाव के बीच अपर्णा यादव ने लखनऊ में विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने सपा और कांग्रेस का झंडा जलाकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने विपक्षी दलों पर महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

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इस घटनाक्रम के बाद सपा खेमे में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। बाराबंकी में मीडिया से बातचीत करते हुए अरविंद सिंह गोप ने कहा कि पार्टी का झंडा केवल एक प्रतीक नहीं बल्कि गरीब, किसान और नौजवानों की पहचान है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के नेता द्वारा इस तरह का कृत्य अस्वीकार्य है और इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

गोप ने स्पष्ट तौर पर कहा कि “जिस झंडे से करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी हों, उसे जलाना बेहद आपत्तिजनक है। यह केवल एक पार्टी का नहीं बल्कि उससे जुड़े लोगों के सम्मान का मामला है।” उन्होंने आगे कहा कि इस मामले में पार्टी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सपा का झंडा पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव की विरासत है, जिसे आज अखिलेश यादव आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाएं कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाती हैं।

वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना से राज्य की सियासत में तनाव और बढ़ सकता है। एक ओर जहां बीजेपी विपक्ष पर हमलावर है, वहीं विपक्षी दल इसे राजनीतिक उकसावे की कार्रवाई बता रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बयानबाजी और राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है।

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फिलहाल, इस पूरे विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति को तेज कर दिया है। अब नजर इस बात पर है कि क्या इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज होती है और कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ती है या नहीं।

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