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Thalapathy का धमाका, जिस Vijay पर हंसी उड़ी, उसने पलटी Tamil Nadu की सियासत

चेन्नई। Tamil Nadu राजनीति में 2026 का चुनाव एक बड़ा बदलाव लेकर आया है। जिस विजय को 2024 में एक “फिल्म स्टार प्रयोग” कहकर नजरअंदाज किया गया था, वही अब सत्ता के केंद्र में पहुंचकर...

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चेन्नई। Tamil Nadu राजनीति में 2026 का चुनाव एक बड़ा बदलाव लेकर आया है। जिस विजय को 2024 में एक “फिल्म स्टार प्रयोग” कहकर नजरअंदाज किया गया था, वही अब सत्ता के केंद्र में पहुंचकर सबसे बड़ी राजनीतिक कहानी बन चुके हैं। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) की जीत ने राज्य की दशकों पुरानी राजनीति को हिला दिया है।

वेटिंग” से सत्ता तक का सफर

विजय अपने फिल्मों में अक्सर कहते थे—“I am waiting।” लेकिन इस बार जनता ने उनका इंतजार खत्म कर दिया। लंबे समय से DMK और AIADMK के बीच घूमती राजनीति से ऊबी जनता को एक नया विकल्प मिला, और उसने उसे खुलकर स्वीकार किया।

DMK-AIADMK की सबसे बड़ी गलती

2024 में विजय की एंट्री पर दोनों बड़े दलों ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। यही रणनीतिक चूक 2026 में भारी पड़ गई। एम के स्टालिन के नेतृत्व वाली DMK को भरोसा था कि एंटी-इंकम्बेंसी वोट बंट जाएगा, लेकिन जमीन पर माहौल पूरी तरह बदल चुका था।

महिलाएं और युवा बने गेम चेंजर

इस चुनाव का सबसे बड़ा मोड़ महिलाओं और युवाओं का रुख रहा।

– महिलाओं का बड़ा वोट बैंक, जो पहले AIADMK के साथ था, TVK की ओर शिफ्ट हुआ

– युवाओं ने फ्रीबी पॉलिटिक्स से हटकर रोजगार और टेक्नोलॉजी को चुना

विजय ने AI मंत्रालय, एजुकेशन लोन और एंटी-ड्रग जैसे मुद्दों से सीधे इस वर्ग को जोड़ा।

अलग रणनीति, अलग लड़ाई

विजय ने पारंपरिक राजनीति से अलग रास्ता चुना।

  • AIADMK को लगभग नजरअंदाज किया
  • मुकाबला सीधा DMK से बनाया
  • बड़े गठबंधनों से दूरी रखी

उन्होंने खुद को “अकेले लड़ने वाले नेता” के रूप में पेश किया—और यही जनता को पसंद आया।

निजी हमलों का उल्टा असर

चुनाव के दौरान विजय पर सोशल मीडिया में निजी हमले भी हुए।
लेकिन इसका उल्टा असर पड़ा। लोगों में यह धारणा बनी कि उन्हें जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है, जिससे उनके प्रति सहानुभूति और बढ़ी।

50 साल पुराना राजनीतिक मॉडल हिला

इस जीत ने यह साफ कर दिया कि तमिलनाडु की जनता अब सिर्फ पारंपरिक विकल्पों तक सीमित नहीं रहना चाहती। DMK और AIADMK के बीच चला आ रहा 50 साल पुराना राजनीतिक संतुलन पहली बार इतने बड़े स्तर पर टूटता नजर आया है।

सिर्फ जीत नहीं, एक नई शुरुआत

विजय की जीत केवल एक चुनावी नतीजा नहीं है, बल्कि एक नई राजनीतिक सोच का संकेत है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या यह बदलाव लंबे समय तक टिकेगा, या फिर तमिलनाडु की राजनीति फिर पुराने ढर्रे पर लौटेगी?

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