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अवैध निर्माण विवाद में अधिवक्ता की मौत, सलेमपुर बार एसोसिएशन का प्रदर्शन

सलेमपुर । बरहज तहसील क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव में जमीन विवाद के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विजेंद्र सिंह की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इस घटना के बाद क्षेत्र में शोक के साथ-साथ आक्रोश का...

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सलेमपुर । बरहज तहसील क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव में जमीन विवाद के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विजेंद्र सिंह की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इस घटना के बाद क्षेत्र में शोक के साथ-साथ आक्रोश का माहौल है। सलेमपुर तहसील बार एसोसिएशन ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

क्या है पूरा मामला

मिली जानकारी के अनुसार, लक्ष्मीपुर गांव में चकनाली की जमीन पर अवैध निर्माण को लेकर विवाद चल रहा था। इस मामले में अधिवक्ता विजेंद्र सिंह ने उपजिलाधिकारी बरहज और ग्राम प्रधान से नियमों के तहत कार्रवाई करने का अनुरोध किया था।

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आरोप है कि इस दौरान प्रशासन की लापरवाही सामने आई और उपजिलाधिकारी के संरक्षण में ग्राम प्रधान द्वारा अधिवक्ता के साथ दुर्व्यवहार किया गया। इसी तनावपूर्ण स्थिति में विजेंद्र सिंह की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें हार्ट अटैक आ गया, जिससे मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई।

अधिवक्ताओं में आक्रोश, किया प्रदर्शन

घटना की जानकारी मिलते ही सलेमपुर तहसील बार एसोसिएशन में शोक की लहर दौड़ गई। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद मिश्र के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया।

इस दौरान अधिवक्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की।

क्या हैं अधिवक्ताओं की मांगें

बार एसोसिएशन ने इस मामले में कई प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए
  • दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो
  • मृतक अधिवक्ता के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए
  • परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए
  • लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए

बड़ी संख्या में अधिवक्ता रहे मौजूद

प्रदर्शन में सदानंद कुशवाहा, जावेद आलम, विवेक सिंह, सत्यप्रकाश यादव, संजय गुप्ता, जितेंद्र मिश्रा, रत्नेश श्रीवास्तव, सत्येंद्र तिवारी, सुधांशु तिवारी सहित सैकड़ों अधिवक्ता मौजूद रहे।

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आगे की चेतावनी

अधिवक्ताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
इस घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि जांच के बाद जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है और पीड़ित परिवार को कब तक न्याय मिल पाता है।

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