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Endrew Mountbattan-Windsor की गिरफ्तारी

ब्रिटेन। किंग चार्ल्स तृतीय के भाई और पूर्व में प्रिंस रहे Endrew Mountbattan-Windsor को गुरुवार सुबह पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आधुनिक ब्रिटिश इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी वरिष्ठ शाही सदस्य को...

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ब्रिटेन। किंग चार्ल्स तृतीय के भाई और पूर्व में प्रिंस रहे Endrew Mountbattan-Windsor को गुरुवार सुबह पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आधुनिक ब्रिटिश इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी वरिष्ठ शाही सदस्य को गिरफ्तार किया गया है। इस घटनाक्रम ने न केवल ब्रिटेन बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है।

किस आरोप में हुई गिरफ्तारी

थेम्स वैली पुलिस के अनुसार, एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर को पब्लिक ऑफिस में दुराचार Misconduct in Public Office के संदेह में गिरफ्तार किया गया है। यह आरोप उस स्थिति में लगाया जाता है जब कोई सार्वजनिक पद पर आसीन व्यक्ति अपने अधिकारों का जानबूझकर दुरुपयोग या उपेक्षा करता है।

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एंड्रयू वर्ष 2001 से 2011 तक ब्रिटेन के ट्रेड एनवॉय (व्यापार दूत) के रूप में कार्यरत रहे थे। हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी दस्तावेजों में खुलासा हुआ कि अपने कार्यकाल के दौरान वह दिवंगत और दोषी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के संपर्क में थे।

इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर यह जांच शुरू हुई कि क्या उन्होंने गोपनीय सरकारी जानकारी एपस्टीन के साथ साझा की थी। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उन्हें किसी भी यौन अपराध के तहत आरोपित नहीं किया गया है। एंड्रयू ने पूर्व में अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि उन्होंने कभी भी एपस्टीन के कथित आपराधिक कृत्यों को न तो देखा और न ही उनका संदेह किया।

कहां से हुई गिरफ्तारी

गुरुवार सुबह बिना निशान वाली पुलिस गाड़ियां नॉरफ़ॉक स्थित सैंड्रिंघम एस्टेट में उनके निवास पर पहुंचीं, जहां से उन्हें हिरासत में लिया गया। यह संयोग ही था कि उसी दिन उनका जन्मदिन भी था। बताया जा रहा है कि वह हाल ही में विंडसर एस्टेट से हटाए जाने के बाद सैंड्रिंघम में रहने आए थे।

नॉरफ़ॉक कांस्टेबुलरी ने पुष्टि की है कि वह इस मामले में थेम्स वैली पुलिस की जांच में सहयोग कर रही है। गिरफ्तारी के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें कहां रखा गया है और कितने समय तक हिरासत में रखा जाएगा। इंग्लैंड और वेल्स में सामान्य मामलों में पुलिस किसी भी संदिग्ध को 24 घंटे तक हिरासत में रख सकती है, जबकि गंभीर मामलों में यह अवधि 96 घंटे तक बढ़ाई जा सकती है।

पहले भी विवादों में रहे हैं एंड्रयू
एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर का नाम पहले भी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े विवादों में आ चुका है। वर्ष 2019 में एक चर्चित बीबीसी इंटरव्यू के बाद उन्हें अपने शाही कर्तव्यों से हटना पड़ा था। उस इंटरव्यू में उन्होंने वर्जीनिया जियुफ्रे से मुलाकात से इनकार किया था, जिन्होंने आरोप लगाया था कि किशोरावस्था में उनके साथ एंड्रयू ने तीन बार यौन संबंध बनाए।

जियुफ्रे ने 2021 में न्यूयॉर्क की अदालत में उन पर यौन उत्पीड़न का मुकदमा दायर किया था। हालांकि एंड्रयू ने आरोपों से इनकार किया, लेकिन 2022 में उन्होंने बिना किसी दोष स्वीकार किए कथित रूप से करोड़ों डॉलर में समझौता कर लिया था।
इसके बाद किंग चार्ल्स तृतीय ने उन्हें “प्रिंस” की उपाधि से वंचित कर दिया और विंडसर एस्टेट से भी बाहर कर दिया। 1936 के त्याग संकट के बाद यह पहली बार था जब किसी वरिष्ठ शाही सदस्य को इस तरह सार्वजनिक रूप से पदावनत किया गया।

किंग चार्ल्स की प्रतिक्रिया
किंग चार्ल्स तृतीय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि उन्हें अपने भाई की गिरफ्तारी की खबर गहरी चिंता के साथ मिली है। उन्होंने यह भी दोहराया कि कानून को अपना काम करने दिया जाएगा और बकिंघम पैलेस जांच में पूरा सहयोग करेगा।
उनका यह रुख दर्शाता है कि शाही परिवार इस मामले को कानूनी प्रक्रिया के तहत ही देखना चाहता है और किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेगा।

कितना असामान्य है यह मामला
आधुनिक ब्रिटिश इतिहास में यह घटना पूरी तरह अभूतपूर्व मानी जा रही है। वर्ष 2002 में प्रिंसेस ऐन पर उनके कुत्ते द्वारा दो बच्चों को काटने के मामले में जुर्माना लगाया गया था, लेकिन उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया था। किसी वरिष्ठ शाही सदस्य की गिरफ्तारी का उदाहरण देखने के लिए 17वीं शताब्दी तक जाना पड़ता है, जब किंग चार्ल्स प्रथम को गिरफ्तार कर बाद में मृत्युदंड दिया गया था।

फिलहाल कई सवाल अनुत्तरित हैं। पुलिस ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि गिरफ्तारी के लिए कौन-सी विशेष जानकारी निर्णायक रही। यह भी स्पष्ट नहीं है कि एंड्रयू को औपचारिक रूप से आरोपित किया जाएगा या पूछताछ के बाद रिहा किया जाएगा।
यह मामला ब्रिटिश शाही परिवार की साख और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और अदालत की कार्यवाही पर पूरे विश्व की नजर रहेगी।

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