नई दिल्ली।
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लोग Food Delivery Graveyard Video के नाम से शेयर कर रहे हैं। इस वीडियो ने फूड डिलीवरी इंडस्ट्री को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और यूजर्स के बीच बहस छेड़ दी है। वायरल क्लिप में बड़ी संख्या में खराब, बिना डिलीवर हुए या लौटाए गए फूड पैकेट्स एक जगह जमा दिखाए गए हैं, जिसे लोग प्रतीकात्मक रूप से फूड डिलीवरी का कब्रिस्तान बता रहे हैं। यह वीडियो सामने आते ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर हंगामा मच गया और फूड वेस्टेज, डिलीवरी सिस्टम और कस्टमर एक्सपीरियंस पर चर्चाएं तेज हो गईं।
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वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे फूड डिलीवरी ऐप्स से ऑर्डर किए गए कई पैकेट्स समय पर डिलीवर नहीं हो पाए या किसी कारणवश कैंसिल हो गए और बाद में उन्हें एक जगह फेंक दिया गया। दावा किया जा रहा है कि ये खाना न तो जरूरतमंदों तक पहुंच पाया और न ही दोबारा इस्तेमाल हो सका। इसी वजह से सोशल मीडिया यूजर्स इसे ग्रेवयार्ड कहकर संबोधित कर रहे हैं। वीडियो के वायरल होते ही लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब देश में लाखों लोग भूखे सोते हैं, तब इतना खाना बर्बाद होना कितनी बड़ी विडंबना है।
इस वायरल वीडियो को लेकर फूड डिलीवरी से जुड़े बर्बाद खाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। हाल के दिनों में यह वीडियो तेजी से शेयर होना शुरू हुआ। यह वीडियो कथित तौर पर किसी शहरी इलाके का बताया जा रहा है, हालांकि सटीक लोकेशन की पुष्टि नहीं हो पाई है। वीडियो में फूड डिलीवरी से जुड़े ऑर्डर्स और अप्रत्यक्ष रूप से डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। ऑर्डर कैंसिलेशन, गलत एड्रेस, देर से डिलीवरी और सिस्टम फेल्योर के कारण खाना बर्बाद होने की बात कही जा रही है। जब ऑर्डर डिलीवर नहीं हो पाते या ग्राहक ऑर्डर लेने से मना कर देते हैं, तो खाना फेंक दिया जाता है, जिससे फूड वेस्टेज बढ़ता है।
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इस वीडियो को देखकर गुस्सा जाहिर किया है। कुछ लोगों ने फूड डिलीवरी कंपनियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है, तो कुछ ने इसे पूरी सप्लाई चेन की समस्या बताया है। यूजर्स का कहना है कि कंपनियों को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे कैंसिल या अनडिलीवर्ड खाना NGOs, शेल्टर्स या जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जा सके। वहीं कुछ लोगों ने यह भी तर्क दिया कि फूड सेफ्टी और हाइजीन नियमों के चलते हर खाना दोबारा डिस्ट्रीब्यूट करना संभव नहीं होता।
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फूड डिलीवरी इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि ऑर्डर कैंसिलेशन और लॉजिस्टिक दिक्कतों के कारण हर दिन बड़ी मात्रा में खाना बर्बाद होता है। तेजी से बढ़ती डिमांड, रियल-टाइम डिलीवरी प्रेशर और ग्राहक अपेक्षाएं इस समस्या को और बढ़ा देती हैं। हालांकि कई प्लेटफॉर्म्स दावा करते हैं कि वे फूड वेस्टेज कम करने के लिए डेटा एनालिटिक्स, बेहतर रूट प्लानिंग और पार्टनर रेस्टोरेंट्स के साथ तालमेल पर काम कर रहे हैं।
इस वीडियो के बाद सरकार और नीति निर्माताओं की भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि फूड वेस्टेज रोकने के लिए सख्त गाइडलाइंस और जवाबदेही तय होनी चाहिए। साथ ही टेक्नोलॉजी के जरिए यह सुनिश्चित किया जाए कि खाने की बर्बादी न्यूनतम हो।
Food Delivery Graveyard Video सिर्फ एक वायरल क्लिप नहीं, बल्कि यह फूड डिलीवरी सिस्टम की उन कमजोरियों को उजागर करता है, जिन पर अब तक ज्यादा बात नहीं हुई थी। यह वीडियो समाज, कंपनियों और सरकार तीनों के लिए एक चेतावनी है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो फूड वेस्टेज की यह समस्या और गंभीर होती जाएगी।
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