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निर्जला एकादशी 2026: बिना जल के कठिन व्रत, भगवान विष्णु की कृपा पाने का विशेष दिन

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और पुण्यदायी व्रतों में से एक माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से...

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और पुण्यदायी व्रतों में से एक माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से उपवास करने पर साल भर की सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है। साल 2026 में निर्जला एकादशी को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। देशभर के मंदिरों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और भक्त भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना में जुट गए हैं।

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस व्रत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पूरे दिन अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है। निर्जला का अर्थ ही होता है बिना जल के। यही कारण है कि इसे सबसे कठिन एकादशी व्रत माना जाता है।

पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत काल में भीमसेन भोजन के बिना नहीं रह पाते थे और सभी एकादशी व्रत नहीं कर सकते थे। तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें केवल निर्जला एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी थी। कहा जाता है कि इस एक व्रत से सभी 24 एकादशियों का पुण्य प्राप्त हो जाता है। इसी कारण इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।

धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 में निर्जला एकादशी 25 जून को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि 24 जून की शाम से शुरू होकर 25 जून की रात तक रहेगी। वहीं व्रत का पारण 26 जून की सुबह शुभ मुहूर्त में किया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

निर्जला एकादशी पर भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और व्रत का संकल्प लेते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा की जाती है। तुलसी दल, पीले फूल, फल और पंचामृत अर्पित किए जाते हैं। कई श्रद्धालु विष्णु सहस्रनाम और भगवद गीता का पाठ भी करते हैं। मंदिरों में भजन-कीर्तन और जागरण का आयोजन भी किया जाता है।

इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व माना जाता है। गर्मी के मौसम को देखते हुए पानी, छाता, पंखा, फल और वस्त्र दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को सुख-समृद्धि और पापों से मुक्ति मिलती है।

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हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वृद्ध लोगों, गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों को अपनी क्षमता के अनुसार ही व्रत करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में भी स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

देशभर के प्रमुख विष्णु मंदिरों और तीर्थ स्थलों पर निर्जला एकादशी के अवसर पर विशेष आयोजन किए जाएंगे। श्रद्धालुओं का मानना है कि सच्चे मन से किया गया यह व्रत जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।

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