| 🌡️ दिल्ली 38°C
Trending News
Hindi News / खबरें

राफेल सौदे पर बढ़ी अनिश्चितता- इंडोनेशिया ने अतिरिक्त ऑर्डर से किया इनकार, तकनीक हस्तांतरण बना बड़ा मुद्दा

नई दिल्ली/पेरिस। फ्रांस के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान Dassault Rafale को लेकर वैश्विक स्तर पर नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। पिछले कुछ हफ्तों में इस डील से जुड़े घटनाक्रमों ने न केवल फ्रांस बल्कि संभावित...

ADVERTISEMENT

नई दिल्ली/पेरिस। फ्रांस के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान Dassault Rafale को लेकर वैश्विक स्तर पर नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। पिछले कुछ हफ्तों में इस डील से जुड़े घटनाक्रमों ने न केवल फ्रांस बल्कि संभावित खरीदार देशों के बीच भी असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। अब इंडोनेशिया द्वारा अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद से इनकार ने इस मुद्दे को और गर्मा दिया है।

इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल देश ने राफेल विमानों के अतिरिक्त ऑर्डर को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है। इससे पहले यह कयास लगाए जा रहे थे कि इंडोनेशिया 12 से 24 और राफेल विमान खरीद सकता है। गौरतलब है कि इंडोनेशिया पहले ही 2022 में 42 राफेल विमानों की खरीद का समझौता कर चुका है।

Read More: सिगरेट कंपनियों के शेयरों में जोरदार उछाल, ITC से गॉडफ्रे फिलिप्स तक निवेशकों की खरीदारी तेज

भारत में भी उठे सवाल

राफेल को लेकर भारत में भी चर्चा तेज है। भारत ने पहले ही राफेल विमानों की खरीद की है और अब 114 और विमानों की संभावित डील पर विचार चल रहा है। इस प्रस्ताव को रक्षा अधिग्रहण परिषद से प्रारंभिक मंजूरी भी मिल चुकी है, लेकिन अंतिम निर्णय अभी लंबित है।

सूत्रों के मुताबिक, तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) इस सौदे में सबसे बड़ा अड़ंगा बन रहा है। फ्रांस द्वारा सोर्स कोड और कुछ संवेदनशील तकनीकों को साझा करने में हिचकिचाहट दिखाई जा रही है, जिससे भारत अपने स्वदेशी हथियार और रडार सिस्टम को पूरी तरह एकीकृत नहीं कर पा रहा है। इसी वजह से भारत अपने विकल्पों पर दोबारा विचार कर सकता है।
यूएई ने भी पीछे खींचे कदम

इससे पहले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भी राफेल के नए वर्जन F5 प्रोजेक्ट से दूरी बना ली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फ्रांस द्वारा अत्याधुनिक तकनीकों, खासकर ऑप्ट्रॉनिक्स सिस्टम, को साझा करने से इनकार के चलते यूएई ने यह फैसला लिया।

यूएई इस प्रोजेक्ट में वित्तीय सहयोग देने वाला प्रमुख साझेदार बनने वाला था और करीब 3.5 अरब यूरो निवेश की योजना थी। ऐसे में उसके हटने से फ्रांस पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

फ्रांस की नई रणनीति

इन चुनौतियों के बावजूद फ्रांस राफेल के नए F5 वर्जन पर काम जारी रखे हुए है। इस वर्जन को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए MBDA द्वारा विकसित ‘Stratus RS’ मिसाइल को शामिल किया जा रहा है। यह एक हाई-सुपरसोनिक, रैमजेट इंजन से लैस मिसाइल होगी, जो दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली को नष्ट करने में सक्षम मानी जा रही है।

Read More: LPG सप्लाई में गिरावट से बढ़ी चिंता, कीमतों पर असर, जानें ताजा रेट

यह मिसाइल SEAD/DEAD मिशनों (दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय करना) के लिए खासतौर पर डिजाइन की जा रही है। इसकी तेज गति और उच्च गतिशीलता इसे रोक पाना बेहद मुश्किल बना सकती है।

राफेल डील से जुड़े ये घटनाक्रम दिखाते हैं कि आधुनिक रक्षा सौदों में केवल कीमत ही नहीं, बल्कि तकनीकी साझेदारी और रणनीतिक भरोसा भी उतना ही अहम है। भारत, यूएई और इंडोनेशिया जैसे बड़े देशों की सतर्कता यह संकेत देती है कि आने वाले समय में रक्षा सौदों की शर्तें और भी कड़ी हो सकती हैं।

फिलहाल, फ्रांस के लिए यह एक परीक्षा की घड़ी है—क्या वह तकनीक साझा कर अपने साझेदार देशों का भरोसा बनाए रख पाएगा या फिर राफेल की वैश्विक पकड़ कमजोर पड़ सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

संबंधित खबरें