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turkman gate violence: जांच में बड़े खुलासे; पुलिस का एक्शन मोड, 11 गिरफ्तार

नई दिल्ली। नई दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैयाज-ए-इलाही मस्जिद के पास हुए एमसीडी अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान भड़की turkman gate violence को लेकर दिल्ली पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है।...

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नई दिल्ली। नई दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैयाज-ए-इलाही मस्जिद के पास हुए एमसीडी अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान भड़की turkman gate violence को लेकर दिल्ली पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। गुरुवार को पुलिस ने इस मामले में 6 और आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिसके बाद अब तक कुल 11 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से की जा रही है और जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस हिंसक घटना में शामिल होने के संदेह में कुल 35 लोगों की पहचान की प्रक्रिया शुरू की गई थी। अब तक 25 लोगों की शिनाख्त कर ली गई है। इनकी पहचान इलाके में लगे CCTV कैमरों की फुटेज, सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों के बॉडी-वॉर्न कैमरों की रिकॉर्डिंग के आधार पर की गई है। अधिकारियों का कहना है कि हर आरोपी की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि बिना पुख्ता सबूत के किसी पर कार्रवाई न हो।

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इससे पहले दिल्ली पुलिस ने पत्थरबाजी और हिंसा की शुरुआती घटनाओं में शामिल 5 लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियां अब उन सभी वीडियो क्लिप्स को फ्रेम-दर-फ्रेम खंगाल रही हैं, जिनमें हिंसा के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। पुलिस का दावा है कि तकनीकी साक्ष्यों के जरिए यह स्पष्ट किया जा रहा है कि किसने भीड़ को उकसाया, किसने पत्थर फेंके और किसने हालात को भड़काने में भूमिका निभाई।

जांच के दौरान कुछ राजनीतिक और सोशल मीडिया से जुड़े नाम भी सामने आए हैं। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी को जांच में शामिल होने के लिए समन भेजा जाएगा। पुलिस का कहना है कि हिंसा भड़कने से पहले उनकी मौजूदगी की जानकारी सामने आई है, जिसे लेकर उनसे पूछताछ जरूरी मानी जा रही है। वहीं, एक यूट्यूबर सलमान की भी तलाश की जा रही है, जिस पर आरोप है कि उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोगों को मौके पर इकट्ठा होने के लिए उकसाया।

एफआईआर के अनुसार, यह हिंसा रात करीब 12:40 बजे उस समय शुरू हुई, जब पुलिस और एमसीडी की टीम अतिक्रमित सरकारी जमीन पर बैरिकेडिंग कर रही थी। आरोप है कि इसी दौरान करीब 30 से 35 लोगों की भीड़ जमा हो गई, जिसने पहले नारेबाजी की और फिर प्रतिबंधात्मक आदेश लागू होने के बावजूद पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस हिंसा में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा और इलाके में तनाव का माहौल बन गया।

मामले में भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। इसके साथ ही सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की रोकथाम अधिनियम, 1984 की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

दिल्ली पुलिस ने साफ किया है कि जांच अभी शुरुआती चरण में नहीं बल्कि निर्णायक मोड़ पर है। जैसे-जैसे सबूत मजबूत होंगे, वैसे-वैसे और गिरफ्तारियां की जाएंगी। पुलिस का दावा है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और किसी भी तरह के दबाव या प्रभाव में आए बिना दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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